17 मई से 15 जून तक पुरुषोत्तम मास

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Patna : बैंड बाजा, बरात, विवाह,

गौना, तिलकोत्सव आदि की धूम पर जल्द विराम लगने वाला है। 17 मई से आरंभ हो रहे पुरुषोत्तम मास में प्रथम बार किए जाने वाले सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाएगी। पुनः 15 जून को इस मास की समाप्ति के बाद मांगलिक कार्यों के मुहूर्त प्राप्त होंगे। पंडित नितेश कुमार ठाकुर ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार इस अधिकमास के 30 दिनों में क्या करना चाहिए या क्या नहीं करना चाहिए, इसे लेकर लोगों में भ्रम है, जबकि शास्त्रों में स्पष्ट व्यवस्था दी गई है।

अधिमास में फल प्राप्ति की कामना से किए जाने वाले सभी कार्य जैसे प्रथम बार तीर्थयात्रा आरंभ, गृहारंभ, गृहप्रवेश, विवाहादि मंगल कृत्य, कुएं, बावली,

तालाब, (बोरिंग) खोदना और उनकी प्रतिष्ठा करना, बाग आदि का आरंभऔर प्रतिष्ठा, किसी व्रत का आरंभऔर उद्यापन, जन्म के छह महीने बाद होने वाले सभी संस्कार जैसे कर्णवेध, मुंडन, यज्ञोपवीत, समावर्तन, विवाह, वधूप्रवेश आदि वर्जित हैं। हालांकि जिन कार्यों के लिए फिर मुहूर्त या अवसर नहीं मिलेंगे और वह आवश्यक हैं, उन पर रोक नहीं है। अधिकमास में नए वस्त्र खरीदने एवं धारण करने, आभूषण, फ्लैट, मकान, टीवी, फ्रीज,

नहीं कर सकेंगे प्रथम बार कोई नवीन कार्य, अलभ्य योगों के प्रयोग पर रोक नहीं

जिन कार्यों के लिए फिर मुहूर्त या अवसर नहीं और वह आवश्यक हैं, उन पर रोक नहीं

अधिकमास में नए वस्त्र खरीदना एवं धारण करना, आभूषण, फ्लैट, मकान शुभ

 

कूलर, एसी, नया वाहन और नित्य उपयोग की वस्तुओं को खरीदना और प्रथम बार उपयोग करना भी शुभमाना गया है। इस महीने में निष्काम भाव से किए गए व्रत आदि का अक्षय फल होता है और व्रती के संपूर्ण अनिष्ट नष्ट हो जाते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं कहा है कि इस मास का फलदाता, भोक्ता और अधिष्ठाता सब कुछ मैं हूं। अतः इस महीने के कृत्य का अक्षय फल होता है। ब्राह्मण और साधुओं सहित दीन दुखियों की सेवा सर्वोत्तम है।

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