गंगा दशहरा 2026 शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

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गंगा दशहरा 2026: शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

 

गंगा दशहरा हिंदू धर्म का अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व माँ गंगा के पृथ्वी पर अवतरण की स्मृति में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन माँ गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थीं। गंगा दशहरा का पर्व श्रद्धा, भक्ति, स्नान, दान और पूजा-अर्चना का विशेष महत्व रखता है।

 

गंगा दशहरा 2026 तिथि एवं शुभ मुहूर्त

 

वर्ष 2026 में गंगा दशहरा ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाएगा।

 

गंगा दशहरा 2026 तिथि: 25 मई 2026, सोमवार

 

दशमी तिथि प्रारंभ: 24 मई 2026 रात्रि

 

दशमी तिथि समाप्त: 25 मई 2026 रात्रि

 

स्नान एवं पूजा का शुभ समय: प्रातःकाल से दोपहर तक अत्यंत शुभ माना जाएगा।

 

 

> नोट: स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।

 

 

 

गंगा दशहरा का पौराणिक महत्व

 

पौराणिक कथा के अनुसार राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों की आत्मा की मुक्ति के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने माँ गंगा को पृथ्वी पर भेजने की अनुमति दी। गंगा की तीव्र धारा को नियंत्रित करने के लिए भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में धारण किया। बाद में माँ गंगा पृथ्वी पर प्रवाहित हुईं और राजा सगर के पुत्रों को मोक्ष प्राप्त हुआ।

 

इसी कारण माँ गंगा को मोक्षदायिनी और पापों का नाश करने वाली देवी माना जाता है।

 

गंगा दशहरा का धार्मिक महत्व

 

गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान और पूजा करने से दस प्रकार के पाप नष्ट होते हैं। “दशहरा” शब्द का अर्थ है — दस पापों का हरण करने वाला।

 

इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों से:

 

पापों का नाश होता है।

 

जीवन में सुख और शांति आती है।

 

रोग और नकारात्मकता दूर होती है।

 

पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।

 

मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

 

 

गंगा दशहरा पूजा विधि

 

1. प्रातः स्नान

 

सुबह जल्दी उठकर गंगा नदी में स्नान करें। यदि गंगा नदी तक जाना संभव न हो तो स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।

 

2. संकल्प लें

 

स्वच्छ वस्त्र धारण कर माँ गंगा का ध्यान करें और पूजा का संकल्प लें।

 

3. पूजा सामग्री

 

फूल एवं माला

 

धूप और दीप

 

दूध एवं गंगाजल

 

मिठाई और फल

 

अक्षत और रोली

 

 

4. माँ गंगा की पूजा

 

माँ गंगा की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप प्रज्वलित करें और फूल अर्पित करें। “ॐ गंगे नमः” मंत्र का जाप करें।

 

मंत्र

 

> “ॐ नमो भगवति हिलि हिलि मिलि मिलि गंगे माँ पावय पावय स्वाहा।”

 

 

 

5. दीपदान

 

शाम के समय नदी में दीप प्रवाहित करें। यह अत्यंत शुभ माना जाता है।

 

6. दान-पुण्य

 

गरीबों को अन्न, वस्त्र, जल और धन का दान करें। गंगा दशहरा पर दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।

 

गंगा दशहरा पर क्या करें

 

गंगा स्नान करें

 

गंगा चालीसा का पाठ करें

 

शिव पूजा करें

 

दान-पुण्य करें

 

गंगा आरती में शामिल हों

 

 

क्या न करें

 

नदी को गंदा न करें

 

किसी का अपमान न करें

 

क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें

 

 

आध्यात्मिक संदेश

 

गंगा दशहरा हमें जीवन में पवित्रता, सेवा, करुणा और सकारात्मकता अपनाने की प्रेरणा देता है। माँ गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था की जीवनरेखा हैं। यह पर्व प्रकृति और नदियों के संरक्षण का संदेश भी देता है।

 

शुभकामना संदेश

 

“माँ गंगा की पावन कृपा से आपका जीवन सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि से भर जाए। गंगा दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएँ।”

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