ग्रहों एवं दिशाओं से संबंधित व्यवसाय

I believe in the power of design.

वास्तु में प्रत्येक दिशा किसी न किसी ग्रह द्वारा शासित होता है। अतः किसी भी व्यवसाय को तत्संबंधी दिशाओं एवं ग्रहों के अनुकूल रहने पर विशेष लाभ मिलती है।

पूर्व दिशा : ग्रहों में सूर्य पूर्व दिशा का स्वामी होता है। दवा, औषधि आदि के लिए पूर्व की दिशा सबसे उपयुक्त है। दवाईयां उत्तर एवं पूर्व के रैक पर रखें। उत्तर-पूर्व के निकट सूर्य की जीवनदायिनी किरणें सर्वप्रथम पड़ती है जो कि दवाईयां को ऊर्जापूर्ण बनाए रखती है। जिसके सेवन से मनुष्य शीघ्रताशीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करता है। आयुर्वेदिक एवं यूनानी दवा जिसका संबंध सूर्य ग्रह से है. अतः इस कारण इसे पूर्व दिशा की रैक पर रखना लाभप्रद होता है। नशीली पदार्थ से संबंधित दवा पश्चिम में रखना ठीक होता है। इस तरह के भूखंड पर ऊनी वस्त्र, अनाज की आढ़त, आटा पिसने की चक्की तथा आटा मिलों का कार्य भी काफी लाभप्रद होता है।

उत्तर-पूर्व दिशा : उत्तर पूर्व दिशा का ग्रह स्वामी गुरु है जो कि आध्यात्मिक एवं सात्विक विचारों के प्रणेता है। उत्तर पूर्व दिशा अभिमुख भूखंड शिक्षक, प्राध्यापक, पुराणवेता, धर्मोपदेशक, पुजारी, धर्म प्रमुख, प्राच्य एवं गुप्त विद्याओं के जानकार, न्यायधीश, वकील, शासन से संबंधित कार्य करने वाले, बैंकिंग व्यवस्था से संबंधित कार्य, धार्मिक संस्थान, ज्योतिष से संबंधित कार्यों के लिए उत्तर पूर्व का दिशा विशेष लाभप्रद होता है। आध्यात्मिक ग्रंथों के छपाई के कार्य के लिए यह दिशा विशेष लाभकारी होता है। साथ ही बिजली के पंखे तथा पंखों के फैक्ट्री का कार्य भी उत्तर-पूर्व दिशा अभिमुख भूखंड पर करना विशेष लाभप्रद होता है। ज्योतिष संबंधी कार्य पर देव गुरु बृहस्पति और मनसे चेतना का कारक ग्रह बुध का प्रभाव होता है। इसलिए ज्योतिष कार्यालय भूखंड के ईशान या उत्तर के क्षेत्र में रखना लाभप्रद होता है। ज्योतिष कार्यालय में हल्के पीले और हरे रंग का उपयोग अधिक से अधिक करना चाहिए। ज्योतिषी के बैठने के लिए कुर्सी का रंग हरा या पीला लाभप्रद होता है। इन्हें पूर्व या उत्तर की तरफ मुख कर कार्य करना चाहिए। कार्यालय में ज्योतिषी के दायें हाथ के तरफ किताब एवं पंचांग आदि रखना चाहिए। कार्यालय के उत्तर-पूर्व में मां सरस्वती, लक्ष्मी एवं गणेश की यंत्र तथा तस्वीर रखना चाहिए।

उत्तर दिशा : उतर दिशा का ग्रह अधिपति बुध है जो मनस चेतना का कारक ग्रह है। उत्तर दिशा अभिमुख भूखंड पर ज्योतिष संबंधित कार्य या व्यवसाय काफी लाभप्रद होता है। धार्मिक ग्रंथ का काव्य लेखन, संपादन, दलाली, कमीशन, कम्प्यूटर इंजीनियर, चार्टड एकाउंटेंट, बिजनेस मैनेजमेंट हेतु बुध का शुभ स्थिति मेंरहना अच्छा होता है। बुध का संबंध हिसाब-किताब से भी है। अतः गणित संबंधित कार्य मी इस तरह की भूखंड पर शुभफलप्रद होता है। डाक-तार विभाग, कला, इलेक्ट्रोनिक से संबंधित कार्य, आयात-निर्यात, स्टेशनरी, वास्तुविद्, रेडियो और टेलीविजन विभाग के लिए उत्तर दिशा अभिमुख भूखंड को अच्छा माना जाता है। टेलीविजन तथा रेडियो का संबंध बुध से है, क्योंकि जिन वस्तुओं से अपने आप आवाज पैदा होती है वह बुध की कारक वस्तुएं होती है। कपड़े के कारखाने या कपड़े के कार्य तथा फूल से संबंधित कार्य हेतु उत्तर अभिमुख दिशा लाभप्रद होता है। जेनरल स्टोर की दुकान, पनसारी का दुकान, परवून की दुकान तथा कपडे के छपाई से संबंधित कार्य हेतु भी उत्तर का दिशा शुभ फलदायी होता है।

उत्तर-पश्चिम दिशा: उत्तर-पश्चिम दिशा का स्वामी चंद्रमा है जिसे रक्त, मन, संचार का कारक माना जाता है। उत्तर-पश्चिम अभिमुख भूखंड पर जल तथा जल से उत्पन्न पदार्थ, सिंघाड़ा, मछली, दूध, दही एवं घी से संबंधित व्यवसाय करना लाभप्रद होता है। इस तरह की भूखंड पर दुधारू जानवर, घोड़े का व्यापार, कैपड़े की खरीद-बिक्री, खेती, शराब, अल्कोहल, चांदी एवं एयर कंडीशन से संबंधित व्यवसाय भी विशेष शुभफलप्रद होता है।आइसक्रीम या शीतल पेय से संबंधित व्यवसाय के लिए सबसे उपयुक्त उत्तर-पश्चिम (वायव्य) की दिशा है। कांच की खाली बोतलें, गैस, पेय भरने की मशीन दक्षिण में रखें। दूध से संबंधित कार्य वायव्य दिशा की ओर करना लाभप्रद होता है। खासकर कच्चे दूध का भंडारण वायव्य की ओर करना चाहिए क्योंकि दूध का कारक चंद्रमा है। इसे भूलकर भी नैऋत्य या पश्चिम दिशा में नहीं करना चाहिए। नैऋत्य में राहु एवं पश्चिम में शनि ग्रह का अधिपत्य होता है। राहु और शनि चंद्रमा के शत्रु होते हैं, फलस्वरूप इस क्षेत्र में दूध का संग्रह करने से दूध शीघ्र खराब हो जाता है।

 

पश्चिम दिशा : पश्चिम दिशा का स्वामी शनि है। इस दिशा पर लोहे का समान, चमड़े का कार्य, कोयला, नीच कर्म, वेश्या की दलाली एवं लकड़ी से संबंधित कार्य करना लाभप्रद होता है। शराब एवं बीयर के कारखाना, लेदर एवं चमड़े के फैक्ट्री के लिए शनि का योग कारक होना आवश्यक है। फर्नीचर तथा लकड़ी की फैक्ट्री का भी शनि से गहरा संबंध है साथ ही शनि लोहे का कारक भी है तथा सभी ट्रांसपोर्ट के साधन जिसका संबंध पैसे कमाने से है वह शनि के प्रभावशाली होने से प्राप्त होता है। डिटर्जेंट तथा साबुन के फैक्ट्री इन कार्यों के लिए पश्चिम दिशा अभिमुख भूखखंड विशेष शुभफलप्रद होता है। क्योंकि साबुन की फैक्ट्री का संबंध शनि से है। पश्चिम अभिमुख भूखंड आंखों के डॉक्टर एवं सीने से संबंधित डॉक्टर के लिए विशेष अच्छा होता है। इस दिशा पर शनि ग्रह का प्रभाव होता है। शनि गंभीर एवं दार्शनिक ग्रह होने के कारण इजीनियर के लिए योग कारक होता है। अतः यह दिशा कम्प्यूटर इंजीनियर, इलेक्ट्रीकल इंजीनियर एवं सिविल इंजीनियर के लिए विशेष शुभफलप्रद होता है।

दक्षिण-पश्चिम : दक्षिण-पश्चिम दिशा का स्वामी राहु है। घर के ड्रेनेज पाईप लाईन, रसोई घर में प्रयोग होने वाली चिमनी जिससे घूंआ बाहर जाती है, बिजली में प्रयोग होने वाली सामग्री, जहर से सबंधित कार्य, बैट्री आदि कार्यों के लिए दक्षिण-पश्चिम का दिशा विशेष लाभप्रद होता है। शराब एवं नशे से संबंधित वस्तुओं पर राहु का अधिपत्य होता है इसलिए भरी हुई शराब की बोतले नैऋत्य कोण में रखें। शराब की खाली बोतलें. कांच की ग्लास आदि दक्षिण दिशा में रखें। पश्चिम में शनि, दक्षिण-पश्चिम में राहु एवं दक्षिण में मंगल जैसे तामसिक ग्रह का प्रभाव होता है। इसलिए मदिरालय में मैनेजर को पश्चिम या दक्षिण की तरफ मुख कर बैठना चाहिए। इसके साथ ही राजनीतिज्ञों, गुप्तचरों तथा वैज्ञानिकों के लिए दक्षिण-पश्चिम अभिमुख भूखंड विशेष लाभकारी होता है।

दक्षिण : दक्षिण दिशा का स्वामी मंगल है। यह दिशा खाने-पीने की वस्तुएं, डायनिंग हॉल, होटल, रेस्तरा, होटल व्यवसाय के लिए लाभप्रद होता है। खाने-पीने की सभी वस्तुओं का संबंध मंगल से है अतः जो कार्य अग्नि तथा पीने के वस्तुओं से जुड़ जाता है उनके लिए मंगल की शुभ स्थिति फलदायी होती है। बिजली. रेडियो, टी.वी., कम्प्यूटर, सर्राफे का कार्य, खुफियागिरी का कार्य, फौज की नौकरी, पुलिस, सेना, डॉक्टर, वकील आदि के लिए दक्षिण अभिमुख भूखंड शुभफलदायी होती है। गैस पर मगल का अधिकार है इसलिए गैस एजेंसी के व्यवसाय में गैस के सिलेंडर दक्षिण दिशा में रखना उपयुक्त होता है। गैस के सिलेंडर नैऋत्य दिशा की ओर न रखें क्योंकि नैऋत्य दिशा का स्वामी राहु है तथा गैस मंगल का प्रतिकात्मक वस्तु है। अतः इस कारण दोनों के संयोग होने से अंगारक योग का निर्माण होता है। जिस कारण सिलेंडर फटना या गैस रिसने जैसी घटनाएं होती है। पश्चिम की दिशा की ओर भी गैस सिलेंडर न रखें। क्योंकि पश्चिम दिशा का स्वामी शनि है जो मंगल का शत्रु ग्रह है। अतः दोनों का एक साथ में होना दुर्घटना एवं परेशानियां देता है। पेट्रोल पंप मंगल के अधिकार क्षेत्र में आता है इसलिए इसे भूखंड के आग्नेय या दक्षिण के क्षेत्र में रखना सबसे उपयुक्त होता है। पेट्रोल पंप को भूखंड के नैऋत्य एवं पश्चिम क्षेत्र में नहीं रखना चाहिए। राहु एवं शनि से मंगल का शत्रुवत् संबंध होता है जिसके फलस्वरूप विपरीत घटना घटने की संभावना बनी रहती है।

दक्षिण-पूर्व : दक्षिण-पूर्व दिशा का स्वामी का शुक्र है। दक्षिण-पूर्व अभिमुख भूखंड पर सिनेमा हॉल, फिल्म स्टूडियो, संगीत, मॉडलिंग एवं नृत्य से संबंधित कार्य लाभप्रद होता है। ग्लैमर तथा शो बिजनेस का शुक्र से सीधा संबंध है अतः इन कार्यों के लिए शुक्र का शुभ होना अत्यंत लाभकारी रहता है। सुगंधित वस्तुए, रेश्मी वस्त्र, महिलाओं से संबंधित वस्त्र, सिले सजावटी वस्त्र अर्थात् रेडिमेड गार्मेन्टस मनोरजन से संबंधित कार्य, सजावट तथा गिफ्ट से संबंधित कार्य के लिए भी यह दिशा योगकारक होता है। ब्यूटीशियन एवं ब्यूटी पार्लर से संबंधित कार्यों के लिए भी यह दिशा अच्छा होता है। गायक तथा कवि के लिए भी यह दिशा शुभफलदायी होता है। गाड़ियों की खरीद बिक्री, कार, स्कूटर तथा व्यक्तिगत आराम के वाहन शुक्र के अंतर्गत आती है। कार की सजावट का कार्य भी शुक्र के अंतर्गत आती है। वास्तुविद् भवन निर्माण का शुक्र से विशेष संबंध है अतः इन कार्यों के लिए भी दक्षिण-पूर्व अभिमुख भूखंड लाभप्रद होता है। जुआ, जुआखाना का संबंध शुक्र एवं राहु से है। इसलिए इनसे संबंधित कार्य आग्नेय या नैऋत्य के क्षेत्र में करना लाभप्रद होता है। सभी प्रकार के सट्टेबाजी का संबंध राहु से है। अतः जुए में जीत हासिल करने के लिए शुक्र एवं राहु दोनों का लाभ मिलना आवश्यक होता है। जुआखाना को उत्तर या पूर्व दिशा की ओर न रखें। उत्तर में बृहस्पति का प्रभाव होता है, जो कि जुए का शत्रु है। पूर्व दिशा में सूर्य का वास होता है, फलस्वरूप जुए से संबंधित कार्य इस दिशा की ओर नहीं चल पाती है।

Related Posts