I believe in the power of design.
वास्तु, ज्योतिष एवं मुहूर्त विज्ञान पर आधारित उच्च कोटि का व्यवहारिक विज्ञान है। ग्रहों और नक्षत्रों के बिना वास्तु का ज्ञान अधुरा प्रतीत होता है। क्योंकि मनुष्य का जीवन भाग्य और वास्तु दोनों से ही सामान रूप से प्रभावित होता है। मनुष्य का भाग्य अच्छा है लेकिन उनकी वास्तु खराब है तो प्रयासों के बावजूद पूर्ण सुख-समृद्धि नहीं मिल पाती है। यदि भाग्य खराब हो एवं वास्तु अनुकूल तो परेशानियां कम होगी लेकिन खत्म नहीं होगी। यदि भाग्य एवं वास्तु दोनों ही खराब हों. तो मनुष्य जीवन भर संघर्षपूर्ण स्थिति से निजात नहीं पा सकता। इसके विपरीत भाग्य के साथ-साथ वास्तु अच्छी रहने पर अधिकतम सुख सुविधा के साथ जीवन यापन करता है। मनुष्य अपने भाग्य को तो बदल नहीं सकता। परंतु वास्तु की सहायता से अपने प्रयत्नों के द्वारा इसे संवार सकता है। ग्रहों की प्रतिकूलता के परिणाम सभी को भोगने पड़ते हैं। जिस प्रकार मानव जीवन पर ग्रहों के शुभाशुभ परिणाम होते हैं उसी तरह अन्य सजीव एवं निर्जीव वस्तुएँ भी ग्रहों एवं रश्मियों के प्रभाव से प्रभावित होते हैं। जहां तक वास्तु का सवाल है भवन में दिशाओं का महत्व है तथा प्रत्येक दिशा किसी न किसी ग्रहों से शासित होता है। दिशाओं के शुभ और अशुभ रहने पर ग्रहों के प्रभाव में भी अंतर आता है। इसलिए कहा जाता है कि वास्तु में दिशाओं को ठीक रखें अन्यथा तत्संबंधी ग्रहों के प्रभाव में भी प्रतिकूलता आ जाएगी। कहा जाता है कि दिशा बदलो दशा बदलेंगी। यदि आपको अपनी दशा में बदलाव लानी है तो उस दिशा को ठीक कर डालिए। तत्पश्चात् आपकी दशा में अवश्य सुधार हो जाएगा। भारतीय ज्योतिष, 9 ग्रह. 12 राशि और 27 नक्षत्र पर आधारित है। सभी राशियों में पंचतत्वों में से किसी न किसी तत्व की प्रधानता रहती है और राशियां भी दिशाओं का प्रतिनिधित्व करता है।
राशि तत्व एवं दिशा :-
मेष अग्नि पूर्व
वृष पृथ्वी दक्षिण
मिथुन वायु पश्चिम
कर्क जल उत्तर
सिंह अग्नि पूर्व
कन्या पृथ्वी दक्षिण
तुला वायु पश्चिम
वृश्चिक जल उत्तर
धनु अग्नि पूर्व
मकर पृथ्वी दक्षिण
कुंभ वायु पश्चिम
मीन जल उत्तर
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May 26
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